Archive for category: दलित विमर्श

दलित की रोटी  ‘अछूत’ और पैसा का क्या?

दलित की रोटी ‘अछूत’ और पैसा का क्या?

2 / October 17, 2010 8:26 am

भारत मेँ दलीत की स्थिति और भारतीय मानसीकता पर आधात करती एक घटना, भारत मेँ दलीत, भारत मे द्लीत समाज, दलीत आज कहाँ है दलीत कौन है दलीत उत्थान के

नक्सलवाद और आंतरिक सुरक्षा

नक्सलवाद और आंतरिक सुरक्षा

0 / August 25, 2010 10:16 pm

नक्सलवाद वामपंथी विचारधारा की वह चरम सीमा या पराकाष्ठा है जिसे 1967 में पश्चिमी बंगाल के नक्सलवादी ग्राम से शुरू किया गया था। करीब इसी समय तेलंगाना में भी एक

नक्सलवाद, भारतीय लोकतन्त्र खतरे में

नक्सलवाद, भारतीय लोकतन्त्र खतरे में

1 / July 17, 2010 12:38 pm

मूलचन्द विश्वकर्मा आज तक मैंने लोगों को अपनी मांगों को लेकर धरना, प्रदर्शन, आंदोलन और भूख हड़ताल करते देखा है लेकिन अपनी मांगें मनवाने के लिए निर्दोष जनता और पुलिस

जात ही पूछो साधू की…..

जात ही पूछो साधू की…..

1 / May 16, 2010 1:31 pm

लोकतंत्र,गणतंत्र और जनतंत्र के बेशर्म चीरहरण की अप-परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमारे देश का विकल्पहीन नेतृत्व एक और ऐतिहासिक गलती करने उद्धत है.वह अब देश की जनगणना को जाति गणना की आग में झोंककर उस पर राजनीतिक तवा चढ़ाना चाहता है जिससे वोट की रोटियां सेंकी जासकें.मिसाइलों,राकेटों,चंद्रयानों और अन्तरिक्ष यात्राओं के युग में जातिआधारित जनगणना उस देश के लिए तो बदनसीबी से बढ़कर कुछ नहीं है