दलित की रोटी ‘अछूत’ और पैसा का क्या?
2भारत मेँ दलीत की स्थिति और भारतीय मानसीकता पर आधात करती एक घटना, भारत मेँ दलीत, भारत मे द्लीत समाज, दलीत आज कहाँ है दलीत कौन है दलीत उत्थान के
नक्सलवाद वामपंथी विचारधारा की वह चरम सीमा या पराकाष्ठा है जिसे 1967 में पश्चिमी बंगाल के नक्सलवादी ग्राम से शुरू किया गया था। करीब इसी समय तेलंगाना में भी एक
मूलचन्द विश्वकर्मा आज तक मैंने लोगों को अपनी मांगों को लेकर धरना, प्रदर्शन, आंदोलन और भूख हड़ताल करते देखा है लेकिन अपनी मांगें मनवाने के लिए निर्दोष जनता और पुलिस
लोकतंत्र,गणतंत्र और जनतंत्र के बेशर्म चीरहरण की अप-परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमारे देश का विकल्पहीन नेतृत्व एक और ऐतिहासिक गलती करने उद्धत है.वह अब देश की जनगणना को जाति गणना की आग में झोंककर उस पर राजनीतिक तवा चढ़ाना चाहता है जिससे वोट की रोटियां सेंकी जासकें.मिसाइलों,राकेटों,चंद्रयानों और अन्तरिक्ष यात्राओं के युग में जातिआधारित जनगणना उस देश के लिए तो बदनसीबी से बढ़कर कुछ नहीं है
भारत मेँ दलीत की स्थिति और भारतीय मानसीकता पर आधात करती एक घटना, भारत मेँ दलीत, भारत मे द्लीत समाज, दलीत आज कहाँ है दलीत कौन है दलीत उत्थान के
नक्सलवाद वामपंथी विचारधारा की वह चरम सीमा या पराकाष्ठा है जिसे 1967 में पश्चिमी बंगाल के नक्सलवादी ग्राम से शुरू किया गया था। करीब इसी समय तेलंगाना में भी एक
मूलचन्द विश्वकर्मा आज तक मैंने लोगों को अपनी मांगों को लेकर धरना, प्रदर्शन, आंदोलन और भूख हड़ताल करते देखा है लेकिन अपनी मांगें मनवाने के लिए निर्दोष जनता और पुलिस
लोकतंत्र,गणतंत्र और जनतंत्र के बेशर्म चीरहरण की अप-परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमारे देश का विकल्पहीन नेतृत्व एक और ऐतिहासिक गलती करने उद्धत है.वह अब देश की जनगणना को जाति गणना की आग में झोंककर उस पर राजनीतिक तवा चढ़ाना चाहता है जिससे वोट की रोटियां सेंकी जासकें.मिसाइलों,राकेटों,चंद्रयानों और अन्तरिक्ष यात्राओं के युग में जातिआधारित जनगणना उस देश के लिए तो बदनसीबी से बढ़कर कुछ नहीं है
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