पितृसत्ता के चक्रव्यूह में फंसी पंचायती राज व्यवस्था
2पितृसत्ता के चक्रव्यूह में फंसी पंचायती राज व्यवस्था: जनसंख्या के लिहाज से भारत के सबसे बडे़ तथा लगभग अस्सी फीसदी ग्रामीण जनता वाले राज्य उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं को पंचायत
आज हमारे देश को एक अजीबो गरीब समस्या ने डस रखा है। जहां भी विकास का कोई कार्य अथवा परियोजना प्रोजेक्ट का प्रारंभ होता है, वहीं उत्पात, दंगा, फसाद प्रारंभ
रहीम की ये पंक्तियां केवल श्लेष अलंकार का उदाहरण नहीं हैं बल्कि समाज में सार्थक भी सिद्ध हुई हैं। पानी केवल मनुष्य मात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि चराचर के सभी जीव जंतुओं के लिए भी आवश्यक निधि है। आज भारत के हर शहर और राज्य में पीने के पानी की किल्लत दिखाई पढ़ रही है। अमृत बहाने वाली नदियों के इस देश में गंदे नालों का पानी नदियों में मिलकर नदियों को दूषित कर रहा है
भारत में सैकड़ों नदियां हैं तथा मनुष्य, पशु एवं वनस्पति को हरा भरा रखने के लिए जल की सख्त आवश्यकता होती है क्योंकि जल ही जीवन है तथा जल का
पितृसत्ता के चक्रव्यूह में फंसी पंचायती राज व्यवस्था: जनसंख्या के लिहाज से भारत के सबसे बडे़ तथा लगभग अस्सी फीसदी ग्रामीण जनता वाले राज्य उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं को पंचायत
आज हमारे देश को एक अजीबो गरीब समस्या ने डस रखा है। जहां भी विकास का कोई कार्य अथवा परियोजना प्रोजेक्ट का प्रारंभ होता है, वहीं उत्पात, दंगा, फसाद प्रारंभ
रहीम की ये पंक्तियां केवल श्लेष अलंकार का उदाहरण नहीं हैं बल्कि समाज में सार्थक भी सिद्ध हुई हैं। पानी केवल मनुष्य मात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि चराचर के सभी जीव जंतुओं के लिए भी आवश्यक निधि है। आज भारत के हर शहर और राज्य में पीने के पानी की किल्लत दिखाई पढ़ रही है। अमृत बहाने वाली नदियों के इस देश में गंदे नालों का पानी नदियों में मिलकर नदियों को दूषित कर रहा है
भारत में सैकड़ों नदियां हैं तथा मनुष्य, पशु एवं वनस्पति को हरा भरा रखने के लिए जल की सख्त आवश्यकता होती है क्योंकि जल ही जीवन है तथा जल का
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