और अब देश के भावी कर्णधारों ने चलाई ‘महंगाई विरोधी मिसाईल
0केवल हमारे देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में महंगाई को लेकर किया जाने वाला विरोध तथा शोर-शराबा कोई नई बात नहीं है। मुंबई फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध नायक
आम आदमी यह देख कर बौखला जाता है कि चावल, गेहूं, दाल, मूंग, तेल जैसी अत्यंत आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमत दिनोंदिन इस कदर बढ़ रहीं है कि वह अपनी
बेतहाशा तेजी से बढ़ रही महंगाई अर्थशास्त्राी पी. एम डा॰ मनमोहन सिंह को महंगाई नहीं लग रही। तभी तो उन्होंने पीड़ित जनता के जख्मों पर मरहम लगाने की बजाए कुरेदना
डा. मनमोहन सिंह के दावों और आंकड़ेगिरी की पोल खुल गई। आर्थिक विकास की कलई उतर गई और स्याह सच सामने आ गया।हाल ही में हुए एक वैश्विक सर्वे से यह
केवल हमारे देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में महंगाई को लेकर किया जाने वाला विरोध तथा शोर-शराबा कोई नई बात नहीं है। मुंबई फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध नायक
आम आदमी यह देख कर बौखला जाता है कि चावल, गेहूं, दाल, मूंग, तेल जैसी अत्यंत आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमत दिनोंदिन इस कदर बढ़ रहीं है कि वह अपनी
बेतहाशा तेजी से बढ़ रही महंगाई अर्थशास्त्राी पी. एम डा॰ मनमोहन सिंह को महंगाई नहीं लग रही। तभी तो उन्होंने पीड़ित जनता के जख्मों पर मरहम लगाने की बजाए कुरेदना
डा. मनमोहन सिंह के दावों और आंकड़ेगिरी की पोल खुल गई। आर्थिक विकास की कलई उतर गई और स्याह सच सामने आ गया।हाल ही में हुए एक वैश्विक सर्वे से यह
1947 से 2009 तक के राजकाल पर यदि हम पैनी दृष्टि डालें तो एक बात स्पष्ट हो जाती है कि कांग्रेस राज में पूंजीपतियों, ब्यूरोक्रेटस, मुनाफाखोरों और बेईमानों ने ही
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