Archive for category: राष्ट्रीय

क्रान्तिधर्मी चेतना का शायर: फैज

0 / October 25, 2011 7:03 pm

हमारा इस बात में दृढ़ विश्वास है कि साहित्य बहुत गहराई से मानवीय नियति के साथ जुड़ा है। स्वतत्रंता और राष्ट्रीय सार्वभौमिकता के बिना साहित्य का विकास संभव नहीं है,

भारतीय संस्कृति और समलैंगिकता

भारतीय संस्कृति और समलैंगिकता

0 / October 8, 2011 1:24 pm

हाल ही में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाब नबी आजाद ने अपने वक्तव्य में समलैंगिकता को एक अप्राकृतिक और गंभीर बिमारी कहकर संबोधित किया. उनके इस कथन से गे और लेस्बियन

क्या खूब, नवाबी!

क्या खूब, नवाबी!

1 / May 19, 2011 1:09 am

प्रस्तावना- ‘‘एक नवाब साहब ने अपनी नवाबी का रोब जमाया, जैसे ही ट्रेन में ‘टीटी’ टिकट चेक करने आया, उसे एक की बजाय दो-दो टिकट थमाया। ‘टीटी‘ ने कहा, आप

माधवपुरा में हुआ था कृष्ण-रुक्ष्मणि विवाह

माधवपुरा में हुआ था कृष्ण-रुक्ष्मणि विवाह

2 / April 6, 2011 3:27 pm

कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। सौराष्ट्र की विविधतापूर्ण धरती पर तीन ऐतिहासिक मेले लगते हैं, जिसमें तरणेतर का मेला (सुरेन्द्रनगर), दूसरा भवनाथ का शिवरात्रि मेला (जूनागढ) और तीसरा पोरबंदर से साठ किलोमीटर

बिटिया की बढ़ी सांसें

बिटिया की बढ़ी सांसें

1 / March 31, 2011 7:54 pm

गुजरात में जगी आस कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। बेटी बचावो-बेटी वधावो, कन्या शिक्षा और कन्या शिक्षा निधि। ये कुछ ऐसे वाक्य हैं, जो गुजरात में पिछले एक दशक से नारे बन

लंका में सब बावन गज के!

लंका में सब बावन गज के!

0 / March 25, 2011 2:42 am

अखबार में कई बार बहुत कुछ विचित्र-सा दिखता पढ़ने को मिल जाता है। जिस ताजा खबर ने मन में कौतुहल पैदा कर दिया, वो यह रही कि उत्तर प्रदेश में

नामी गिरामी हस्तियों के विवाहेत्तर संबंध

नामी गिरामी हस्तियों के विवाहेत्तर संबंध

0 / March 25, 2011 2:23 am

विवाहेत्तर संबंध, सैफ अली, अमृता सिंह , धर्मेन्द्र ,

प्रेमियों का विवाह कराने पर उन्होंने मृत्युदण्ड पाया

प्रेमियों का विवाह कराने पर उन्होंने मृत्युदण्ड पाया

0 / February 3, 2011 2:12 pm

‘वेलेण्टाइन डे‘ यानी प्रेम दिवस। 14 फरवरी को संपूर्ण विश्व में बड़ी तैयारियों के साथ मनाया जाता है, वेलेण्टाइन डे। सूचना क्रान्ति व सेटेलाइट के इस युग में यह दिवस

भ्रष्टाचारी राज करेंगे?

भ्रष्टाचारी राज करेंगे?

3 / January 25, 2011 4:47 pm

इसे हम देश का दुर्भाग्य कहें या जनता की सहनशीलता, भ्रष्टाचारी राज कर रहे हैं और ईमानदारों का उपहास हो रहा है। लोगों की सोच को बदलने के प्रयास करने

देह हो गई दौलत

देह हो गई दौलत

1 / January 21, 2011 2:13 pm

भारतीय संस्कृति में मानव देह ईश्वर के उपहार की अनमोल अभिव्यक्ति है क्योंकि व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज, समाज से राज्य, राज्य से राष्ट्र और राष्ट्र से अनन्त तक