क्रान्तिधर्मी चेतना का शायर: फैज
0हमारा इस बात में दृढ़ विश्वास है कि साहित्य बहुत गहराई से मानवीय नियति के साथ जुड़ा है। स्वतत्रंता और राष्ट्रीय सार्वभौमिकता के बिना साहित्य का विकास संभव नहीं है,
हाल ही में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाब नबी आजाद ने अपने वक्तव्य में समलैंगिकता को एक अप्राकृतिक और गंभीर बिमारी कहकर संबोधित किया. उनके इस कथन से गे और लेस्बियन
प्रस्तावना- ‘‘एक नवाब साहब ने अपनी नवाबी का रोब जमाया, जैसे ही ट्रेन में ‘टीटी’ टिकट चेक करने आया, उसे एक की बजाय दो-दो टिकट थमाया। ‘टीटी‘ ने कहा, आप
कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। सौराष्ट्र की विविधतापूर्ण धरती पर तीन ऐतिहासिक मेले लगते हैं, जिसमें तरणेतर का मेला (सुरेन्द्रनगर), दूसरा भवनाथ का शिवरात्रि मेला (जूनागढ) और तीसरा पोरबंदर से साठ किलोमीटर
हमारा इस बात में दृढ़ विश्वास है कि साहित्य बहुत गहराई से मानवीय नियति के साथ जुड़ा है। स्वतत्रंता और राष्ट्रीय सार्वभौमिकता के बिना साहित्य का विकास संभव नहीं है,
हाल ही में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाब नबी आजाद ने अपने वक्तव्य में समलैंगिकता को एक अप्राकृतिक और गंभीर बिमारी कहकर संबोधित किया. उनके इस कथन से गे और लेस्बियन
प्रस्तावना- ‘‘एक नवाब साहब ने अपनी नवाबी का रोब जमाया, जैसे ही ट्रेन में ‘टीटी’ टिकट चेक करने आया, उसे एक की बजाय दो-दो टिकट थमाया। ‘टीटी‘ ने कहा, आप
कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। सौराष्ट्र की विविधतापूर्ण धरती पर तीन ऐतिहासिक मेले लगते हैं, जिसमें तरणेतर का मेला (सुरेन्द्रनगर), दूसरा भवनाथ का शिवरात्रि मेला (जूनागढ) और तीसरा पोरबंदर से साठ किलोमीटर
गुजरात में जगी आस कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। बेटी बचावो-बेटी वधावो, कन्या शिक्षा और कन्या शिक्षा निधि। ये कुछ ऐसे वाक्य हैं, जो गुजरात में पिछले एक दशक से नारे बन
अखबार में कई बार बहुत कुछ विचित्र-सा दिखता पढ़ने को मिल जाता है। जिस ताजा खबर ने मन में कौतुहल पैदा कर दिया, वो यह रही कि उत्तर प्रदेश में
‘वेलेण्टाइन डे‘ यानी प्रेम दिवस। 14 फरवरी को संपूर्ण विश्व में बड़ी तैयारियों के साथ मनाया जाता है, वेलेण्टाइन डे। सूचना क्रान्ति व सेटेलाइट के इस युग में यह दिवस
इसे हम देश का दुर्भाग्य कहें या जनता की सहनशीलता, भ्रष्टाचारी राज कर रहे हैं और ईमानदारों का उपहास हो रहा है। लोगों की सोच को बदलने के प्रयास करने
भारतीय संस्कृति में मानव देह ईश्वर के उपहार की अनमोल अभिव्यक्ति है क्योंकि व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज, समाज से राज्य, राज्य से राष्ट्र और राष्ट्र से अनन्त तक
प्रतिक्रियाएं