Archive for category: नजरिया

आरक्षण के इस खेल में कितना और गिरेंगे

आरक्षण के इस खेल में कितना और गिरेंगे

2 / January 30, 2012 4:07 pm

पांचों राज्यों के चुनाव की मण्डी सज चुकी है सभी अपने माल को बढ़िया व दूसरे के माल को घटिया बता बोली लगा। खरीद-फरोख्त में मशगूल हो गए है। चुनाव

अन्ना हजारे का ट्रेलर : डॉ. शशि तिवारी

अन्ना हजारे का ट्रेलर : डॉ. शशि तिवारी

1 / October 25, 2011 5:52 pm

अन्ना हजारे का ट्रेलर : डॉ. शशि तिवारीयहाँ दोनों लघु कहानी कही न कही परोक्ष रूप से कांग्रेस पर फिट बैठती नजर आ रही है और यह कई जगहों पर

न्यू मीडिया में हिंदी की दशा और दिशा

न्यू मीडिया में हिंदी की दशा और दिशा

4 / September 12, 2011 8:13 pm

न्यू मीडिया , विशेष तौर पर हिंदी न्यू मीडिया जिसका सबसे लघु इकाई एक ब्लॉग को कहा जा सकता है , अब तक का सर्वाधिक निरीह  और गैर-प्रभावी बता कर

बौराया मीडिया, बेईमान कांग्रेस, बेख़ौफ़ बाबा

बौराया मीडिया, बेईमान कांग्रेस, बेख़ौफ़ बाबा

22 / June 4, 2011 10:34 pm

वर्तमान परिस्थितों को देखते यह साफ समझा जा सकता है की कौन बेईमान है और कौन इमानदार ? देश के चौथे स्तम्भ की वेश्यावृति अब प्रत्यक्ष रूप से सामने आ

चोर सिपाही के खेल में अमेरिका की दबंगाई

चोर सिपाही के खेल में अमेरिका की दबंगाई

0 / May 30, 2011 12:17 am

कहते हैं पाप का घड़ा एक न एक दिन भर ही जाता है। चोर कितना ही चालाक क्यों न हो एक न एक दिन पकड़ा या मारा ही जाता है।

क्या खूब, नवाबी!

क्या खूब, नवाबी!

1 / May 19, 2011 1:09 am

प्रस्तावना- ‘‘एक नवाब साहब ने अपनी नवाबी का रोब जमाया, जैसे ही ट्रेन में ‘टीटी’ टिकट चेक करने आया, उसे एक की बजाय दो-दो टिकट थमाया। ‘टीटी‘ ने कहा, आप

राजनीतिज्ञों के टी.वी चैनल

राजनीतिज्ञों के टी.वी चैनल

1 / March 30, 2011 2:43 am

राजनीतिज्ञों के टी.वी चैनल: (लेखक : अशोक गुप्त ) . मीडिया को राजनीतिज्ञों की और राजनीतिज्ञों को मीडिया की जरूरत पड़ती ही है। शायद इसीलिए मीडिया और राजनीतियों का चोली दामन

हू वाज श्यामजी कृष्ण वर्मा?

1 / March 28, 2011 4:26 pm

हू वाज श्यामजी कृष्ण वर्मा? भारतीय विदेश मंत्रालय की बेरुखी या बेखयाली -81वीं पुण्यतिथि पर विशेष अहमदाबाद। क्रांतिकारियों में गौरवपूर्ण स्थान रखने वाले भारतीय क्रांतिकारियों में सुभाषचंद्र बोस के बाद

मेरी मिट्टी से भी खुश्बू-ए-वतन आएगी

0 / March 26, 2011 3:50 pm

मेरी मिट्टी से भी खुश्बू-ए-वतन आएगी गणतंत्र भारत में स्वतंत्रता की सांस ले रही आज की युवा पीढ़ी को गुलामी के कोड़ों की अनुभूति नहीं है। परतंत्रता के दु:खद काल

रोल मॉडल  : क्या कहते हैं सितारे

रोल मॉडल : क्या कहते हैं सितारे

0 / February 3, 2011 2:59 pm

आमतौर पर यही माना जाता है कि कोई भी व्यक्ति शारीरिक, जैविक और वैचारिक स्तर से मिलकर बनता है। जैसे-जैसे व्यक्ति बढ़ता और विकसित होता है, इन स्तरों पर वह बड़ा