कुछ बात है कि हस्ती…
1कुछ बात है कि हस्ती… कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। पूरा देश इस समय विश्व कप क्रिकेट के बुखार में जकड़ा हुआ है। प्रतियोगिता के हर मैच को लेकर लोगों में जबर्दस्त
एक बहुत ही पुरानी कहावत है कि ‘चले थे नमाज पढ़ने, रोजे गले पड़ गये।‘ आज यह कहावत पूरी पूरी कॉमनवेल्थ गेम्स के मुखिया सुरेश कलमाडी पर बिल्कुल सही बैठती
दिल्ली में होने वाले गुलाममंडल खेलों के उद्घाटन, समापन आदि के लिए बना जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम भी अंततः तैयार हो ही गया। इसका नाम नेहरू स्टेडियम बिल्कुल ठीक ही
यह लेख अजय झा जी ने करिब एक माह पुर्व लिखा था, उनका अंदेशा सच निकला इसलिए इसे अभी प्रकाशित किया जा रहा है.
कुछ बात है कि हस्ती… कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। पूरा देश इस समय विश्व कप क्रिकेट के बुखार में जकड़ा हुआ है। प्रतियोगिता के हर मैच को लेकर लोगों में जबर्दस्त
एक बहुत ही पुरानी कहावत है कि ‘चले थे नमाज पढ़ने, रोजे गले पड़ गये।‘ आज यह कहावत पूरी पूरी कॉमनवेल्थ गेम्स के मुखिया सुरेश कलमाडी पर बिल्कुल सही बैठती
दिल्ली में होने वाले गुलाममंडल खेलों के उद्घाटन, समापन आदि के लिए बना जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम भी अंततः तैयार हो ही गया। इसका नाम नेहरू स्टेडियम बिल्कुल ठीक ही
यह लेख अजय झा जी ने करिब एक माह पुर्व लिखा था, उनका अंदेशा सच निकला इसलिए इसे अभी प्रकाशित किया जा रहा है.
करोडोँ विज्ञापनबाजी पर खर्च हो चुके हैं। करोड़ों विज्ञापनबाजी से कमाए भी जा रहे हैं। 1500 करोड़ का तो सिर्फ सट्टा ही लग चुका है। अच्छा होगा यदि सरकार भविष्य में सट्टे व जुए को वैधता मान्य कर मान्यता प्रदान कर दे। इससे सरकार को करोड़ों रूपये राजस्व में मिलेंगे। वैसे भी सरकार लाॅटरी चला ही रही है, दारू-शराब उत्पादन को बढ़ावा दे ही रही है। फिर सट्टा भी यदि मान्यता पा जाता है तो गलत क्या है
आईओए अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी के नेतृत्व में मीडिया के सामने इस फैसले के खिलाफ सभी खेल संघों के अध्यक्षों ने जोर देकर कहा कि खेल मंत्रालय का ये फैसला आईओए और खेलसंघों की स्वायत्तता पर हमला है। अगर सरकार ने ओलंपिक चार्टर की अनदेखी की तो इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) भारत को किसी भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने से रोक सकती है।
बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे (आईपीएल) से हम निकले। किसी मशहूर शायर के शेर का यह एक मिसरा ही ललित मोदी के लिये काफी है। आईपीएल 3 के फाईनल के ठीक बीस मिनट बाद बीसीसीआई ने यह भी फाइनल कर दिया कि अब जनाब मोदी की उन्हें जरूरत नहीं हालांकि इस पूरे मसले पर केन्द्र सरकार भी गंभीरता से नजर रखे हुए थी। प्रधानमंतत्री मनमोहन सिंह ने 21 अप्रैल को इस मसले पर बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला से बात भी की थी।
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