क्या हम राष्ट्रीय स्वाभिमान भूल चुके हैं?
1क्या हम राष्ट्रीय स्वाभिमान भूल चुके हैं? हाल ही में एक और पाकिस्तानी “सोफ़िस्टिकेटेड भिखमंगे” राहत फ़तेह अली खान को भारतीय कस्टम अधिकारियों ने गैरकानूनी रूप से सवा लाख डालर
जिस तरह से वर्षाऋतु में पानी बरसता है और पूरी प्रकृति का रंग हरियाली के रूप में बदल जाता है। क्योंकि पानी वृक्षों के लिये वरदान साबित होता है। और
नए साल के पहले ही दिन असम में ‘उल्फा’ प्रमुख अरविंद राजखोवा की जेल से रिहाई से यहां के राजनैतिक माहौल में एक आशा की किरण दिखाई तो देती है
लातूर (महाराष्ट्र): ‘पैगाम इस्लाम’ नाम के उत्तर प्रदेश के एक संगठन ने लातूर में जारी एक फतवे में सरे मुसलमानों से यह अपील की है की वह इस्लाम की रक्षा
क्या हम राष्ट्रीय स्वाभिमान भूल चुके हैं? हाल ही में एक और पाकिस्तानी “सोफ़िस्टिकेटेड भिखमंगे” राहत फ़तेह अली खान को भारतीय कस्टम अधिकारियों ने गैरकानूनी रूप से सवा लाख डालर
जिस तरह से वर्षाऋतु में पानी बरसता है और पूरी प्रकृति का रंग हरियाली के रूप में बदल जाता है। क्योंकि पानी वृक्षों के लिये वरदान साबित होता है। और
नए साल के पहले ही दिन असम में ‘उल्फा’ प्रमुख अरविंद राजखोवा की जेल से रिहाई से यहां के राजनैतिक माहौल में एक आशा की किरण दिखाई तो देती है
लातूर (महाराष्ट्र): ‘पैगाम इस्लाम’ नाम के उत्तर प्रदेश के एक संगठन ने लातूर में जारी एक फतवे में सरे मुसलमानों से यह अपील की है की वह इस्लाम की रक्षा
भारत में माओवादियों के बढ़ते प्रभाव और राजनेताओं के ढुलमुल रवैये ने स्थिति को खतरनाक हद तक पहुंचा दिया है। हाल में बिहार के लखीसराय में पुलिस के चार जवानों
भाजपा को नहीं, भारत को बचाना है! डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ ================= इस समय भाजपा अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही है। इसलिये अब हम भारतीयों को चाहिये कि
नक्सलवाद वामपंथी विचारधारा की वह चरम सीमा या पराकाष्ठा है जिसे 1967 में पश्चिमी बंगाल के नक्सलवादी ग्राम से शुरू किया गया था। करीब इसी समय तेलंगाना में भी एक
पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को लेकर इन दिनों पूरे विश्व के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। पकिस्तान के दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हालात तथा वहां हमेशा से होती आ
सन् 2010 अब करीब आधा बीच चुका है। भारत को विश्व शक्ति बनने के लिए आन्तरिक सुरक्षा को अत्यन्त मजबूत करना होगा। नक्सलवादियों-माओवादियों को शीघ्रातिशीघ्र कुचलना प्राथमिकता होनी चाहिए। यह
शादाब जफर शादाब एक महिला के पेशाब करते वक्त निकलने वाली आवाज का अपने उपन्यास में अश्लील शब्दांे में मजे ले लेकर वर्णन कर देश और दुनियां में रातों रात
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