क्या हम राष्ट्रीय स्वाभिमान भूल चुके हैं?
1क्या हम राष्ट्रीय स्वाभिमान भूल चुके हैं? हाल ही में एक और पाकिस्तानी “सोफ़िस्टिकेटेड भिखमंगे” राहत फ़तेह अली खान को भारतीय कस्टम अधिकारियों ने गैरकानूनी रूप से सवा लाख डालर
एक कहावत है ’हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा‘। इसके पहले जो है, वह सब जानते हैं फिर भी कोई कुछ नहीं कर पाया। एक
इन दिनों पेड न्यूज को लेकर नई बहस चल पड़ी है। मीडिया को समाज निर्माण का औजार मानने वाले लोगों ने जब यह महसूस किया कि चुनावों में वैसे लोग
सोनिया गाँधी, और यु पी ए का कार्यकल , जिसे उपमा सवरूप “c ” कार्यकाल कहा जा सकता है. “c ” से congress से “c ” से corruption का ऐसे
क्या हम राष्ट्रीय स्वाभिमान भूल चुके हैं? हाल ही में एक और पाकिस्तानी “सोफ़िस्टिकेटेड भिखमंगे” राहत फ़तेह अली खान को भारतीय कस्टम अधिकारियों ने गैरकानूनी रूप से सवा लाख डालर
एक कहावत है ’हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा‘। इसके पहले जो है, वह सब जानते हैं फिर भी कोई कुछ नहीं कर पाया। एक
इन दिनों पेड न्यूज को लेकर नई बहस चल पड़ी है। मीडिया को समाज निर्माण का औजार मानने वाले लोगों ने जब यह महसूस किया कि चुनावों में वैसे लोग
सोनिया गाँधी, और यु पी ए का कार्यकल , जिसे उपमा सवरूप “c ” कार्यकाल कहा जा सकता है. “c ” से congress से “c ” से corruption का ऐसे
आजादी के बाद देश में इस कदर भ्रष्टाचार फैला कि लगा कि मानो हमें अंग्रेजी राज से नहीं बल्कि घोटाले करने की आजादी मिल गई है। राजसत्ता में रही कांग्रेस
लातूर (महाराष्ट्र): ‘पैगाम इस्लाम’ नाम के उत्तर प्रदेश के एक संगठन ने लातूर में जारी एक फतवे में सरे मुसलमानों से यह अपील की है की वह इस्लाम की रक्षा
समाचारपत्र में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अध्ययन से पता चला है कि देश में फुटपाथ पर बसर करने वाले करीब 55 प्रतिशत बच्चे
सत्ता में आने के बाद कुछ माह तक मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत ने अपने निवास पर जनता दरबार लगाकर, जनता की शिकायतें सुनने का प्रयास किया था, जिनका हश्र जानकर कोई भी कह सकता है कि राज्य की नौकरशाही पूरी तरह से निरंकुश एवं सरकार के नियन्त्रण से बाहर हो चुकी है। प्राप्त शिकायतों पर मुख्यमन्त्री के विशेषाधिकारी (आईएएस अफसर) की ओर से कलक्टरों एवं अन्य उच्च अधिकारियों को चिठ्ठी लिखी गयी कि मुख्यमन्त्री चाहते हैं कि जनता की शिकायतों की जाँच करके सात/दस दिन में अवगत करवाया जावे। इन पत्रों का एक वर्ष तक भी न तो जवाब दिया गया है और न हीं किसी प्रकार की जाँच की गयी है। इसके विपरीत मुख्यमन्त्री से मिलकर फरियाद करने वाले लोगों को अफसरों द्वारा अपने कार्यालय में बुलाकर धमकाया भी जा रहा है। साफ शब्दों में कहा जाता है कि मुख्यमन्त्री ने क्या कर लिया? मुख्यमन्त्री को राज करना है तो अफसरशाही के खिलाफ बकवास बन्द करनी होगी। ऐसे हालात में राजस्थान की जनता की क्या दशा होगी, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है।
पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल कयानी का कार्यकाल बढ़ने से भारत को चिंता होना स्वाभाविक है। पाकिस्तान में असली शक्ति उनके पास ही है। उनके बिना भारत-पाकिस्तान की सारी वार्तायेँ
शीर्षक पढ़कर शायद अजीब सा लगेगा क्योंकि जन्म से ही यह सुनकर बड़े हुए हैं कि कानून के लम्बे हाथ होते हैं परंतु आजकल हमारे देश में इसका एक दम
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