माधवपुरा में हुआ था कृष्ण-रुक्ष्मणि विवाह
2कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। सौराष्ट्र की विविधतापूर्ण धरती पर तीन ऐतिहासिक मेले लगते हैं, जिसमें तरणेतर का मेला (सुरेन्द्रनगर), दूसरा भवनाथ का शिवरात्रि मेला (जूनागढ) और तीसरा पोरबंदर से साठ किलोमीटर
‘वेलेण्टाइन डे‘ यानी प्रेम दिवस। 14 फरवरी को संपूर्ण विश्व में बड़ी तैयारियों के साथ मनाया जाता है, वेलेण्टाइन डे। सूचना क्रान्ति व सेटेलाइट के इस युग में यह दिवस
दीपावली यानी दीप पक्तियां, अमावस्या को जब चन्द्रमा और सूर्य दोनों किसी भी एक डिग्री पर होते हैं तो गहन अंधकार को जन्म देते हैं। दीपावली गहन अंधकार में भी
जगत् में चराचर के स्वामी, दुनिया को कर्म,अकर्म का पाठ पढ़ाने वाले, गोपियों से लेकर ज्ञानियों तक सबको मंत्रामुग्ध और अपने वश में कर लेने वाले, तीनों लोकांे में एकछत्रा
कन्हैया कोष्टी अहमदाबाद। सौराष्ट्र की विविधतापूर्ण धरती पर तीन ऐतिहासिक मेले लगते हैं, जिसमें तरणेतर का मेला (सुरेन्द्रनगर), दूसरा भवनाथ का शिवरात्रि मेला (जूनागढ) और तीसरा पोरबंदर से साठ किलोमीटर
‘वेलेण्टाइन डे‘ यानी प्रेम दिवस। 14 फरवरी को संपूर्ण विश्व में बड़ी तैयारियों के साथ मनाया जाता है, वेलेण्टाइन डे। सूचना क्रान्ति व सेटेलाइट के इस युग में यह दिवस
दीपावली यानी दीप पक्तियां, अमावस्या को जब चन्द्रमा और सूर्य दोनों किसी भी एक डिग्री पर होते हैं तो गहन अंधकार को जन्म देते हैं। दीपावली गहन अंधकार में भी
जगत् में चराचर के स्वामी, दुनिया को कर्म,अकर्म का पाठ पढ़ाने वाले, गोपियों से लेकर ज्ञानियों तक सबको मंत्रामुग्ध और अपने वश में कर लेने वाले, तीनों लोकांे में एकछत्रा
यूं तो फ्रांस में वर्ष 2004 से ही पब्लिक स्कूलों में मुस्लिम महिलाओं के लिये हेड स्कार्फ लगाने पर प्रतिबंध है परन्तु अभी हाल में ही फ्रांस की संसद ने
श्रावणी की पूर्णिमा के दिन बहनों द्वारा अपने भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधने का अपना अलग महत्त्व है। रक्षा बंधन हमारे देश के कई राज्यों में सदियों से मनाया
न मैं कृष्ण (द्रौपदी का एक और लाभ) और न तुम कृष्ण, फिर भी तुमने मेरी रक्षा का संकल्प लिया है। इस दुनियां में भाई-बहन के पवित्रा रिश्ते जैसा और
भारतीय आदिवासियों के जीवन में सेक्स का अपना महत्व है। वे आधुनिक सभ्यता से बहुत दूर संस्कृति परिवर्तन से अछूते हैं। दिन भर की थकान के बाद ये आदिवासी रात्रि
” मंडी हाउस ” – यह नाम केवल एक आम बस स्टॉप या नवनिर्मित मेट्रो स्टेशन का भी नहीं, बल्कि एक ऐसे हाउस का है (माफ़ करें यहाँ अंग्रेजी के हाउस शब्द के बजाए हिंदी का घर ज्यादा उपयुक्त संज्ञा रहेगी ) जिसके आँगन में न जाने कितने सपने टूटे- बिखरे और कितने साकार हो, आज जीवंत आदर्श के रूप में स्थापित हैं. परन्तु नाम का प्रभाव इतना सार्थक रूप से किसी और जगह दृष्टिगोचर नहीं होता.
शौक भी अजीब होते हैं। एक शौक है दूसरों को काल के मुंह में धकेल कर आनंद लूटने का। भारत वर्ष में तो जानवरों व पशु पक्षियों, मुर्गों को, चिड़ियाओं
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