Archive for August, 2010

अफज़ल गुरू को मिलेगा भारत रत्न -एक मज़ेदर पैरोडी

अफज़ल गुरू को मिलेगा भारत रत्न -एक मज़ेदर पैरोडी

3 / August 31, 2010 5:15 pm

आपके लिये विचार मीमांसा की टीम लाई है , फोटो ब्लॉग श्रृँखला ! अब शब्द नही तस्वीरेँ बोलेंगी. ! तो आईये देखते है, कैसे नाश मारा है , इन नेताओँ

कवि की नायिका तू अति सुन्दर

2 / August 31, 2010 4:55 pm

अधर सुन्दर वदन सुन्दर नयन सुन्दर हँसी सुन्दर ह्रदय सुन्दर गमन सुन्दर कवि की नायिका तू अति सुन्दर ———————— वचन सुन्दर चरिता सुन्दर वसन सुन्दर करवट सुन्दर चलना सुन्दर भ्रमण

बदलो   बदलो   मास्साब !

बदलो बदलो मास्साब !

0 / August 31, 2010 3:48 pm

नया ज़माना, नई फ़िज़ा, नया रंग, नया ढंग । ऐसे में जब शिक्षा आमूल चूल रुप से बदल रही है, तब हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि शिक्षण के

सब कुछ काम चलाऊ है भारत में

सब कुछ काम चलाऊ है भारत में

0 / August 31, 2010 3:15 pm

‘कामचलाऊ‘ शब्द आज हिंदी में सबसे अधिक प्रयुक्त होने वाला शब्द है। हमारे भारतवर्ष में यह कामचलाऊ शब्द अनेक चीजों के साथ जाने अनजाने जुड़ ही जाता है। लोग यही

शाप संत मणि बाबा का

शाप संत मणि बाबा का

0 / August 31, 2010 9:09 am

जा तू अजगर हो जा।’ ‘जा रे अभिमानी, तू राक्षस हो जा।’ ‘जा, तुझे मैं पत्थर होने का शाप देता हूँ।‘ जा तू गिरगिट हो जा रे पापी। प्राचीन काल

महिला को सशक्त बनाता बुर्का

महिला को सशक्त बनाता बुर्का

0 / August 31, 2010 6:57 am

इन दिनों दुनियां भर में बुर्के को लेकर बवाल मचा है। पक्ष या विपक्ष में जुबानी जमा खर्च चल रहा है। साथ ही इसके पक्ष एवं विपक्ष में नानाविध तर्क

विश्वविद्यालय – ज्ञान की चुनौतियाँ

विश्वविद्यालय – ज्ञान की चुनौतियाँ

0 / August 31, 2010 6:40 am

क्या हमारे विश्वविद्यालय विश्व स्तर की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं? क्या विश्व स्तर और विश्व बाजार में अपना नाम रोशन कर सकते हैं? क्या हमारी शिक्षा की गुणवत्ता

महंगाई गाथा महंगाई डायन गाए जात है

महंगाई गाथा महंगाई डायन गाए जात है

0 / August 31, 2010 5:46 am

हमारे कर्णधार सफाई पसंद हैं। वे रोज देश की सफाई कर करके सारा कचरा स्विटजरलैंड के बैंक में फैंकते रहते हैं। इसके उलट हम महंगाई पसंद लोग हैं। बाहर से

प्रकृति के अजूबे ये पेड़-पौधे

प्रकृति के अजूबे ये पेड़-पौधे

6 / August 31, 2010 5:12 am

प्रकृति रहस्यों से भरी-पड़ी है। प्रकृति की विचित्राताओं पर जब विचार व चिन्तन किया जाता है तो सिरजनहार की अद्भुत कारीगरी पर हम स्तब्ध रह जाते हैं। वनस्पतियों के इस

बच्चन जी…आप पहले सही थे या अब गलत हैं? -राजीव तनेजा

बच्चन जी…आप पहले सही थे या अब गलत हैं? -राजीव तनेजा

3 / August 30, 2010 9:55 pm

आदरणीय बच्चन जी, चरण स्पर्श, मैँ राजीव…दिल वालों की नगरी..दिल्ली से…आपका एक अदना सा प्रशंसक…. वैसे तो सुबह से लेकर रात तक मेरी दिनचर्या कुछ ऐसी है कि मैँ हर