कैसे मिलेगी मुक्ति बिहार और झारखंड के तिकड़मबाज नेताओं से ?
0Dr. Gaurishankar Rajhansh पार्लियामेंट ’का सेंट्रल हाल‘ एक बड़ी दिलचस्प जगह है। खासकर वहां उन दिनों बड़ी रौनक रहती है जब संसद का सत्रा नहीं चल रहा हो। वहां सांसद,
ये स्साला!…कम्प्यूटर भी गज़ब की चीज़ है ....गज़ब की क्या?..बिमारी है स्साला…बिमारी| एक बार इसकी लत पड गय
भारत में सैकड़ों नदियां हैं तथा मनुष्य, पशु एवं वनस्पति को हरा भरा रखने के लिए जल की सख्त आवश्यकता होती है क्योंकि जल ही जीवन है तथा जल का
GHANSHYAM BADAL लीजिये पंद्रह अगस्त फिर आ गया, हर बार की तरह एक बार फिर गाना बजाना होगा, फिर जोशो ओ जश्न के साथ पूरा देश नाचेगा, झूमेगा, गायेगा और
Dr. Gaurishankar Rajhansh पार्लियामेंट ’का सेंट्रल हाल‘ एक बड़ी दिलचस्प जगह है। खासकर वहां उन दिनों बड़ी रौनक रहती है जब संसद का सत्रा नहीं चल रहा हो। वहां सांसद,
ये स्साला!…कम्प्यूटर भी गज़ब की चीज़ है ….गज़ब की क्या?..बिमारी है स्साला…बिमारी| एक बार इसकी लत पड गय
भारत में सैकड़ों नदियां हैं तथा मनुष्य, पशु एवं वनस्पति को हरा भरा रखने के लिए जल की सख्त आवश्यकता होती है क्योंकि जल ही जीवन है तथा जल का
GHANSHYAM BADAL लीजिये पंद्रह अगस्त फिर आ गया, हर बार की तरह एक बार फिर गाना बजाना होगा, फिर जोशो ओ जश्न के साथ पूरा देश नाचेगा, झूमेगा, गायेगा और
VIRENDRA SINGH PARIHAR: दिग्विजय सिंह ने गत दिनों एक साक्षात्कार में मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा को लेकर कह दिया कि प्रभात की औकात क्या है ? इतना ही
हमारे देश का आम आदमी इन दिनों जहां लगातार बढ़ती जा रही ‘डायन’ रूपी महंगाई से बेज़ार है। वहीं उससे अधिक अफसोसनाक बात यह है कि उसी व्यक्ति द्वारा दोगुनी
एक रोज मैं परिवार सहित टेªन द्वारा मुरादाबाद जा रहा था। जैसे ही जम्म्ूातवी सियालदह एक्सप्रेस टेªन प्लेटफार्म पर आकर रूकी, मैं लोकल डिब्बे ढंूढने लगा। टेªन में केवल तीन
गत लोकसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी राजनैतिक दलों के मन में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को लेकर एक संशय है। इस विषय पर काफ़ी कुछ
Dr. Yogesh Sharma मुल्ला नसरूद्दीन के नाम पर एक प्रसिद्ध लघु कथा श्रृंखला लिखी गई है तथा इन सभी लघु कहानियों का मुख्य कलाकार स्वयं मुल्ला नसरूद्दीन ही हैं। इस
UPDHYAN CHANDRA KOCHAR 1971-72 की घटनाएं पाकिस्तान के इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाओं में से थीं। बंगलादेश के संदर्भ में 1971 की हार के बाद भुट्टो की बढ़ती शक्ति ने
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