सावधान! तेजाबी कलम पर नौकरशाही चाहे होना हावी
आखिरकार सूचना अधिकार के सुखद और सफल परिणाम देखने को मिलने लगे। इस अ़िधकार ने ही लम्बे समय तक धूल खाती फाईलों को पंख दिये वरना तो आम आदमी के
***राजीव तनेजा*** ठक...ठक... ठक्क...ठक्क “लगता है स्साला!...ऐसे नहीं खोलेगा....तोड़ दो दरवाज़ा”… "जी!…जनाब
कुछ दिनों पहले मंगलोर में एक विमान दुर्घटना हुई थी जिसमें 158 यात्रियों की मौत हुई तथा इस पर काफ़ी हो-हल्ला मचाया गया था। प्रफ़ुल्ल पटेल की इस बात के लिये आलोचना हुई थी कि नई बनी हुई छोटी हवाई पट्टी पर बड़ा विमान उतारने की इजाजत कैसे दी गई? लेकिन न तो इस मामले में आगे कुछ हुआ, न ही किसी मंत्री-अफ़सर का इस्तीफ़ा हुआ। इस विमान दुर्घटना के कई पहलुओं में से एक महत्वपूर्ण पहलू को मीडिया ने पूरी तरह से
दो चार दिन पूर्व अंतर सोहिल जी की टिपपणी मिली थी , उन्होने पूछा था कि इस गर्मी से कब निजात मिलेगी
आखिरकार सूचना अधिकार के सुखद और सफल परिणाम देखने को मिलने लगे। इस अ़िधकार ने ही लम्बे समय तक धूल खाती फाईलों को पंख दिये वरना तो आम आदमी के
***राजीव तनेजा*** ठक…ठक… ठक्क…ठक्क “लगता है स्साला!…ऐसे नहीं खोलेगा….तोड़ दो दरवाज़ा”… "जी!…जनाब
कुछ दिनों पहले मंगलोर में एक विमान दुर्घटना हुई थी जिसमें 158 यात्रियों की मौत हुई तथा इस पर काफ़ी हो-हल्ला मचाया गया था। प्रफ़ुल्ल पटेल की इस बात के लिये आलोचना हुई थी कि नई बनी हुई छोटी हवाई पट्टी पर बड़ा विमान उतारने की इजाजत कैसे दी गई? लेकिन न तो इस मामले में आगे कुछ हुआ, न ही किसी मंत्री-अफ़सर का इस्तीफ़ा हुआ। इस विमान दुर्घटना के कई पहलुओं में से एक महत्वपूर्ण पहलू को मीडिया ने पूरी तरह से
दो चार दिन पूर्व अंतर सोहिल जी की टिपपणी मिली थी , उन्होने पूछा था कि इस गर्मी से कब निजात मिलेगी
हाँ!…मैंने भी ‘बलात्कार’ किया…किया है उसका …जो जगत जननी है …जीवन दायनी है…लाखों-करोड़ों की संगिन
बेचारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उनकी रातों की नींद का क्या होगा। जब-जब किसी "मासूम", "भटके हुए", "निरपराध" भारतीय को कोई विदेशी सरकार परेशान करती है तो मनमोहन सिंह की रातों की नींद खराब हो ही जाती है। कुछ दिनों पहले ही यह खबर आई थी कि ब्रिटेन ने "जोकर" (सॉरी जाकिर) नाईक को उनके देश में प्रवेश देने से इंकार कर दिया था (यहाँ देखें… http://arabnews.com/world/article68460.ece) और अब ताज़ा खबर यह है
पाठकों ने अक्सर विभिन्न ब्लॉग्स और फ़ोरमों पर वामपंथी समर्थकों को अपने सिद्धान्त और नैतिकता या सेकुलरिज़्म सम्बन्धी लेक्चर झाड़ते सुना ही होगा। वामपंथियों को इस बात का मुगालता हमेशा रहा है कि इस देश में सेकुलरिज़्म यदि जिन्दा है तो सिर्फ़ उन्हीं की वजह से, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा को वे लोग एक ही सिक्के के दो पहलू मानते आये हैं। हालांकि उनके इन "सिद्धान्तों"(?) की पोल कई बार खुल चुकी है, फ़िर भी वे
***राजीव तनेजा*** "अरे!…गांधी जी…आप?…आप यहाँ कैसे?…प्रणाम स्वीकार करें"… "इधर-उधर क्या देख रह
दिल्ली में भूकंप के झटके दिल्ली में भूकंप के झटके दिल्ली में भूकंप के झटके दिल्ली में भूकंप के झटके दिल्ली में भूकंप के झटके दिल्ली में भूकंप के झटके
जब इन्फ़ोसिस के पूर्व सीईओ नन्दन नीलकेणि ने बहुप्रचारित और अनमोल टाइप की “यूनिक आईडेंटिफ़िकेशन नम्बर” योजना के प्रमुख के रूप में कार्यभार सम्भाला था, उस समय बहुत उम्मीद जागी थी, कि शायद अब कुछ ठोस काम होगा, लेकिन जिस तरह से भारत की सुस्त-मक्कार और भ्रष्ट सरकारी बाबू प्रणाली इस योजना को पलीता लगाने में लगी हुई है, उस कारण वह उम्मीद धीरे-धीरे मुरझाने लगी है। UID (Unique Identification Number) बनाने
प्रतिक्रियाएं