श्यामपुर के जंगल में कई जानवर रहते थे. इन्ही जानवरों में सेवु नाम का चील, कीकड़ नाम का बगुला और स्वेतु नाम का सर्प भी रहते थे. इन तीनों में बड़ी गहरी मित्रता थी. ये तीनों हर काम मिल-जुल कर करते थे. कीकड़ स्वेतु से बहुत इर्ष्या करता था, क्योंकि स्वेतु अच्छे स्वभाव का नहीं था. ज़रा-सी बात पर गुस्सा हों जाता था. कीकड़ और सेवु पक्षी प्रजाति के थे और स्वेतु सर्प प्रजाति का था. कभी-कभी तो कीकड़ का मन होता था की वो स्वेतु की हत्या कर दे.
एक दिन मौका देख कर कीकड़ ने सेवु चील को स्वेतु सर्प के खिलाफ भडकाया परन्तु चील उसकी बातों में न आई. जिस जगह वो तीनों रहते थे उस जगह एक चोटी मुनमुन चिड़िया अपने घोसले में रहती थी. उसने कीकड़ के इरादों को भाँप लिया था. एक बार चील को दूर-दूर तक कोई जीव भोजन के लिए नहीं मिल रहे थे. वो दुखी मन से आ कर बगुले के पास बैठ गई. उसने कीकड़ को अपनी सारी समस्या बताई. कीकड़ ने कहा, “मैं तुम्हे खाने के लिए भोजन दे सकता हूँ परन्तु तुम्हे अपने दोस्त सांप की क़ुरबानी देनी पड़ेगी”.
चील का भूख के मारे बुरा हाल हो रहा था. इसलिए उसने कीकड़ की बात मान ली. कीकड़ ने खाने के लिए उसे मछलियाँ दी. अपने वादे के अनुसार उसने स्वेतु को कीकड़ के हवाले कर दिया. स्वेतु ने अंतिम समय तक हार न मानी उसने बड़ी ही फुर्ती से कीकड़ का गला जकड लिया. आखरी में सर्प स्वेतु की बड़ी दर्दनाक मृत्यु हुई, न तो उसे सेवु भुला पाई न ही मुनमुन चिड़िया.
कीकड़ को भी इसकी सज़ा मिली. एक बार जब वो तालाब के पास आराम कर रहा था तब एक मगरमच्छ ने आकर उसे जकड लिया. कीकड़ की स्वेतु से भी दर्दनाक मृत्यु हुई. चील को अकेलापन खा गया. मुनमुन चिड़िया मन ही मन सोचती रही की आखिर विजय किसकी हुई?
तीनों को अपनी मित्रता की कुर्बानी देनी पड़ी.
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