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kanishka kashyap / April 30, 2010 8:54 pm
कुछ दिनों पहले टी वी में समाचार आया . रवि किशन को उन्ही के नंबर से उन्हें हीं कॉल कर उन्हें हैरत में डाल दिया गया. या दलेर मेहंदी के नंबर से रवि किशन के मोबाईल पर कॉल जा रही थी जबकि डाले मेहंदी को यह बात पता भी नहीं . हालाँकि यह तकनीक ज्यादा जटिल नहीं . मुझे यह तकनीक का ज्ञान ४ वर्ष पहले था जब मैं नोएडा में अपनी बी पी ओ कंपनी चला रहा था .
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Manas Khatri / April 30, 2010 8:30 pm
क्या मिलता है तुम्हे बहा कर रक्त?
क्यों बर्वाद करते हो इसमें अपना अमूल्य वक़्त?
छोड़ दो इन भयानक कर्यों को,
बन जाओ अच्छे इन्सान,
करते हो लोगों की नींदें हराम,
आतंक मचा रखा है तुमने तमाम,
सहमा हुआ है नगर का हर इन्सान,
अब तेरे पापों का घड़ा भर चुक है,
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Rashmi Prabha / April 30, 2010 8:26 pm
ये तो धागों की कमी थी
तो जब जहाँ जैसा मिला
उससे रफू कर दिया
काफी नाम है
इस खैराती ज़िन्दगी के पैबन्दों की
इस कारीगरी के आगे
आत्मा में लगे घावों की क्या बिसात
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Rashmi Prabha / April 30, 2010 2:52 am
अपने सुकून के लिए समुद्र मंथन मत करो
हर बार अमृत नहीं निकलता
और गर निकल भी जाए
तो उसे असुरों को समर्पित करना
तुम्हारी विशालता नहीं
कायरता है !
तुम अच्छी तरह जानते हो
ढाँचे के क्षणिक रद्दोबदल से
बुनियाद नहीं बदलती !
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kanishka kashyap / April 30, 2010 12:34 am
. परदे के पीछे , नेपथ्य से आने वाली हर आवाज़ को हम नाटक का हिस्सा मान रहे हैं . हमें वह आवाज नहीं सुनाई दे रही या कहें की हम फर्क नहीं समझ पा रहे हैं . एक आवाज़ हमें आगाह भी कर रही है . “हिन्दू मुस्लिम भाई भाई ” तक तो ठीक है पर “मुस्लिम भाई हिन्दू भौजाई ” वाला यह खेल सारे खेलों से ज्यादा खतरनाक है
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Manas Khatri / April 29, 2010 9:12 pm
सुबह होते ही मुँह उठाये चले आते हैं,
मुफ्त की चाय पी जाते हैं.
कपडा धोने के लिए तो “सर्फ” भी नहीं लाते हैं,
हर रविवार को एक मुट्ठी मांग ले जाते हैं,
हमारे भी हैं पड़ोसी एक,
विचारों के हैं वो बहुत ही नेक.
हमसे कुछ मांगने की जगह हमें ही दे जाते हैं,
ज़रूरत पड़ने पर काम आते हैं
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Manas Khatri / April 29, 2010 7:23 pm
३ घंटे में करने होते हैं लघ्भाक ४० सवाल,
एक भी छूटा तो घर पर होता है बवाल.
परीक्षा के एक दिन पहले,
रात को नींद नहीं आती है,
अच्छा नंबर पाने के लिए,
भगवान की याद आती है.
रखते हैं विद्यार्थी भगवन का व्रत,
अगर फेल हुए तो होता है “डंडे से नृत्य”
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Manas Khatri / April 29, 2010 8:41 am
लोगों को शादी का विषय है इतना भाया,
की कई निर्माताओं ने इस पर हिट फिल्म भी है बनाया.
जब भी मौसम है शादियों का आता,
सभी का दीवाला निकल जाता.
लोग अधिक लोगों को देते हैं इनविटेशन,
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VICHARMIMANSA DESK / April 29, 2010 6:28 am
केंद्र सरकार ने इसे गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में शामिल करने का प्रस्ताव किया है.वहीँ चौदह अप्रैल को हुई भगदड़ और हादसे को देखते हुए इस बार की सुरक्षा व्सवस्था असाधारण की गई है
राजीव तनेजा / April 28, 2010 4:19 pm
***राजीव तनेजा*** “ठक्क……ठक्क- ठक्क”…. “ओ….कुण्डी ना खड़का …सोणया सिद्धा अन्दर आ"… “ठक्क……ठक
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