cometchat 1.6 for sharetronix!
3DOWNLOAD COMETCHAT 1.6 nulled , for sharetronix 1.5x . CLICK ON THE LINK BELOW! http://www.ziddu.com/downloadlink/12741247/cometchatbyGreatkaniska.zip DONT FOR GET TO SAY THANKS! in the comment box !
जब भी उसके मन में आये , जबरन वो घर में घुस जाए , बहू बेटियों की इज्ज़त लूटे, बच्चों को भी मार के जाए , कोई न मौका उसने छोड़ा , चांस मिला तब लाज उतारी ,
अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते और उनके मरने पर - ये नेता - हमारा पैसा तो ना खर्च करते
(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर(Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झुट्ठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें) अच्छा!!! वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है? मगर सुन - दोस्ती में - इतना तो सहना ही पड़ता है तय है - जरुर खोलेंगे एक और खिड़की - उसकी ख़ातिर मगर - हम नाराज़ हैं - तेरे लिए इतना तो कहना ही पड़ता है
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जब भी उसके मन में आये , जबरन वो घर में घुस जाए ,
बहू बेटियों की इज्ज़त लूटे, बच्चों को भी मार के जाए ,
कोई न मौका उसने छोड़ा , चांस मिला तब लाज उतारी ,
अरे – समझौता गाड़ी की मौतों पर – क्या आंसू बहाना था
उनको तो – पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही – जाना था
मरने ही जा रहे थे – लाहौर, करांची – या पेशावर में मरते
और उनके मरने पर – ये नेता – हमारा पैसा तो ना खर्च करते
(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर(Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झुट्ठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें)
अच्छा!!! वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है?
मगर सुन – दोस्ती में – इतना तो सहना ही पड़ता है
तय है – जरुर खोलेंगे एक और खिड़की – उसकी ख़ातिर
मगर – हम नाराज़ हैं – तेरे लिए इतना तो कहना ही पड़ता है
अगर आपको सपनो में दिलचस्पी है, तो सपने आपका जीवन भी दिलचस्प बना सकते हैं. वह आपको आने वाले कल की सुचा दे सकते हैं, कल के खतरे के प्रति
मै डर गया हूँ तुम नहीं चाहते, मैं नहीं चाहता बमों और गोलियों से मारा जाना नहीं चाहता टुकड़ो में कर दिया जाना कोई नहीं चाहता यह सब पर यह
तुम्हे इसी पिंजड़े में रहना होगा चाहे खुला आसमान हो तुम्हारी इक्षा! परतंत्र इक्षा या अनिक्षा कोई माइने नहीं रखती! तुम्हे इसी पिंजड़े में रहना होगा! इसी पिंजड़े में रहकर
कहा जाता है की आदत आठ साल में बदल सकती है , दशा दस साल में परन्तु संस्कार सौ साल में भी नहीं बदल सकते . अब सांप है तो डसेगा हीं!
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